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UPSC Sociology Optional | Emergence of Sociology | Complete FREE Course by Shekhar Dutt Sir

UPSC Sociology Optional | Emergence of Sociology | Complete FREE Course by Shekhar Dutt Sir

Sleepy Sociology

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Video Summary

यह वीडियो यूरोप में मॉडर्निटी, सामाजिक परिवर्तन और समाजशास्त्र के उद्भव की पड़ताल करता है। यह बताता है कि कैसे पुनर्जागरण, फ्रांसीसी क्रांति और औद्योगिक क्रांति जैसी ऐतिहासिक घटनाओं ने पारंपरिक समाज को बदल दिया और नए विचारों, जैसे धर्मनिरपेक्षता और समतावाद को जन्म दिया। इन परिवर्तनों से उत्पन्न सामाजिक समस्याओं, जैसे खराब श्रमिक स्थितियाँ, परमाणु परिवारों का उदय और शहरीकरण की चुनौतियों को समझने की आवश्यकता ने समाजशास्त्र को एक नए अनुशासन के रूप में स्थापित किया।

Short Highlights

  • मॉडर्निटी और सामाजिक परिवर्तन: यूरोप में पुनर्जागरण, फ्रांसीसी क्रांति और औद्योगिक क्रांति ने पारंपरिक समाज को बदला और नए विचारों को जन्म दिया।
  • मॉडर्निटी के प्रभाव: इसने धर्मनिरपेक्षता, समतावाद और उपयोगितावाद जैसे विचारों को बढ़ावा दिया।
  • सामाजिक समस्याएँ: औद्योगिकरण, शहरीकरण और उदारवादी लोकतंत्रों के उदय से श्रमिकों की खराब स्थिति, परमाणु परिवारों का उदय, अपराध और गरीबी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुईं।
  • समाजशास्त्र का जन्म: इन जटिल सामाजिक समस्याओं को समझने, समझाने और समाधान खोजने की आवश्यकता ने समाजशास्त्र को एक अलग अनुशासन के रूप में जन्म दिया।
  • समाजशास्त्र का उद्भव: 1838 में ऑगस्ट कॉमटे द्वारा समाजशास्त्र शब्द का पहली बार प्रयोग किया गया, जो यूरोप के सामाजिक और बौद्धिक उथल-पुथल का परिणाम था।

Key Details

मॉडर्निटी एंड सोशल चेंजेस इन यूरोप एंड इमरजेंस ऑफ सोशलॉजी [1:00]

  • मॉडर्निटी को "कुछ नया सोचना या अलग सोचना" के रूप में परिभाषित किया गया है, जो परंपराओं का विरोध करता है।
  • यह एक तुलनात्मक प्रक्रिया है जहाँ वर्तमान की तुलना अतीत से की जाती है।

मॉडर्निटी इज़ थिंकिंग न्यू या थिंकिंग डिफरेंट।

रेनेसा और सेकुलरिज्म [4:44]

  • रेनेसा (पुनर्जागरण) यूरोप में "मानव का पुनर्जन्म" के रूप में उभरा, जिसने अंधकार युग की रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी।
  • इसने चर्च के प्रभुत्व को कम किया और "इस दुनिया के सुख" (this worldly pleasure) पर ध्यान केंद्रित किया।
  • रेनेसा ने धर्मनिरपेक्ष विचारधारा को बढ़ावा दिया, जहाँ लोग धार्मिक आधार के बजाय धर्मनिरपेक्ष विचारों पर बातचीत करने लगे।
  • धर्मनिरपेक्षता को व्यापक रूप से तब परिभाषित किया जाता है जब धर्म सामाजिक जीवन से पीछे हट जाता है।

आफ्टर लाइफ के कांसेप्ट को देखो आफ्टर लाइफ के कांसेप्ट को हमने डिनाई कर दिया कि हमें नहीं चाहिए आफ्टर लाइफ। हमें चाहिए दिस वर्ल्डली प्लेजर।

फ्रांसीसी क्रांति और औद्योगिक क्रांति [8:29]

  • फ्रांसीसी क्रांति (1779-89) ने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के विचारों को जन्म दिया, जिससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों की मांग बढ़ी।
  • औद्योगिक क्रांति ने उपयोगितावाद (utilitarianism) के दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया, जिसमें लोगों की अधिकतम खुशी को महत्व दिया गया।
  • इन क्रांतियों ने लोकतंत्र की नींव रखी और समाज में बड़े बदलाव लाए।

मैक्सिमम हैप्पीनेस फॉर मैक्सिमम नंबर ऑफ पीपल।

एज ऑफ एनलाइटनमेंट और साइंटिफिक डिस्कवरीज [11:07]

  • ज्ञानोदय (Age of Enlightenment) के दौरान, लोगों ने तर्क और वैज्ञानिक तरीकों से ब्रह्मांड को समझने की क्षमता पर विश्वास करना शुरू कर दिया।
  • गैलीलियो, केप्लर और न्यूटन जैसे वैज्ञानिकों ने चर्च की शिक्षाओं को चुनौती दी, जिससे वैज्ञानिक खोजों और सार्वभौमिक नियमों में विश्वास बढ़ा।
  • वैज्ञानिक प्रगति ने यह विश्वास जगाया कि समाज के लिए भी ऐसे ही नियम बनाए जा सकते हैं।

हम यूनिवर्स को समझ सकते हैं उसको रीजन कर सकते हैं और हम इसको इंपीरिकली इंपीरिकल एक बहुत इंपॉर्टेंट वर्ड यूज़ करेंगे हम सोच बार-बार इंपेरिकल मतलब जो एक्सपेरिमेंट करके देखा गया हो।

सामाजिक परिवर्तन और समस्याएँ [14:04]

  • मॉडर्निटी ने यूरोप में महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन लाए, जैसे सामंती समाज से औद्योगिक समाज में परिवर्तन।
  • इसके परिणामस्वरूप उदारवादी लोकतंत्रों का उदय हुआ और एक नए मध्य वर्ग का उदय हुआ।
  • इन परिवर्तनों से श्रमिकों की खराब स्थिति, परमाणु परिवारों का उदय, शहरीकरण, अपराध में वृद्धि और गरीबी जैसी नई समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।

हम रिएक्ट करते हैं। हमारा समाज हर चीज को रिएक्ट करता है तो और अपने आप को बदलता है।

उदारवादी लोकतंत्र की समस्याएँ [20:05]

  • तेजी से हुए सामाजिक परिवर्तन और क्रांतियों के कारण उत्पन्न अराजकता (chaos) ने लोगों को अनिश्चित और चिंतित कर दिया।
  • लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था कि नए राजनीतिक व्यवस्थाएँ कैसे काम करेंगी और क्या वे वास्तव में बेहतर होंगी।
  • इस अनिश्चितता ने कुछ समूहों को मध्ययुगीन सामंती व्यवस्था में लौटने का समर्थन करने के लिए प्रेरित किया।

पीपल डिड नॉट अंडरस्टैंड हाउ इट विल वर्क आउट एंड विल दे बी बेटर ऑफ।

मध्य वर्ग का उदय [21:43]

  • मध्य वर्ग एक नई सामाजिक श्रेणी के रूप में उभरा, जो न तो अमीर था और न ही गरीब।
  • उनकी महत्वाकांक्षाएँ ऊँची थीं और वे समाज में अधिक शक्ति और प्रभाव चाहते थे।
  • इस वर्ग ने सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मिडिल क्लास इज़ नॉट पुअर। तो उसको लगता है वो ऊपर आ सकती है।

समाजशास्त्र का जन्म [23:23]

  • तेजी से हो रहे सामाजिक परिवर्तनों और उनसे उत्पन्न जटिल समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए एक नई ज्ञान प्रणाली (body of knowledge) की आवश्यकता महसूस हुई।
  • समाजशास्त्र को एक ऐसे अनुशासन के रूप में जन्म दिया गया जो समाज को वैज्ञानिक तरीके से समझा सके, भविष्यवाणियाँ कर सके और समाधान सुझा सके।
  • 1838 में ऑगस्ट कॉमटे ने पहली बार "समाजशास्त्र" शब्द का प्रयोग किया और इसे "सामाजिक भौतिकी" (social physics) के रूप में देखा।

एक बीओके हमें चाहिए थी जो ये सब प्रॉब्लम्स को समझे और इसके बारे में हमें एक नया डिसिप्लिन हमें चाहिए था जो इसको समझे एंड एक्सप्लेन करें।

समाजशास्त्र के उद्भव के संदर्भ [27:01]

  • समाजशास्त्र के उद्भव को दो स्तरों पर समझा जा सकता है: एक सामान्य संदर्भ (general context) और एक तात्कालिक संदर्भ (immediate context)।
  • सामान्य संदर्भ में एनलाइटनमेंट, सामंती समाज का अंत, उदारवादी लोकतंत्रों और मध्य वर्ग का उदय शामिल है।
  • तात्कालिक संदर्भ फ्रांसीसी क्रांति से उत्पन्न हुई अराजकता और सामाजिक अस्थिरता से आता है, जिसने समाज को समझने की तत्काल आवश्यकता पैदा की।

जनरल कॉन्टेक्स्ट में आप बताओगे बहुत सारी चीजें कि भ कि आपको मैं यहां पे क्विकली यहां पे समराइज़ कर रहा हूं कि एनलाइटनमेंट होई जा रही थी दुनिया में।

समाजशास्त्र को प्रभावित करने वाली शक्तियाँ [29:01]

  • समाजशास्त्र के विकास में राजनीतिक क्रांति (जैसे फ्रांसीसी क्रांति), औद्योगिक क्रांति, पूंजीवाद, समाजवाद, नारीवाद और शहरीकरण जैसी सामाजिक शक्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • धर्म में आए बदलावों ने भी समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए सामग्री प्रदान की।

पॉलिटिकल रेवोल्यूशन, इंडस्ट्रियल एवोल्यूशन, कैपिटलिज्म, सोशलिज्म, फेमिनिज्म, अर्बनाइजेशन एंड रिलीजियस चेंजेस।

विभिन्न देशों में समाजशास्त्र का विकास [31:36]

  • फ्रांस में साइमन, कॉमटे और डर्काइम जैसे विचारकों ने समाजशास्त्र के विकास में योगदान दिया।
  • जर्मनी में हीगल, मार्क्स और वेबर जैसे विचारकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • ब्रिटेन में एडम स्मिथ और हर्बर्ट स्पेंसर जैसे विचारकों के विचारों का भी प्रभाव पड़ा।

फ्रांस में सोशलॉजी कैसे डेवलप होती है वहां पे साइमन, कॉमटेड, डरखाइम।

प्रारंभिक समाजशास्त्रियों के विचार [33:39]

  • प्रारंभिक समाजशास्त्र को इनसाइक्लोपीडिक, विकासवादी (evolutionary) और प्रत्यक्षवादी (positivist) माना जाता है, जो प्राकृतिक विज्ञान से प्रभावित था।
  • यह नई औद्योगिक समाजों पर केंद्रित था और कुछ को रेडिकल तथा कुछ को रूढ़िवादी माना जाता था।

बहुत ही इनसाइक्लोपीडिक थी। बड़ी-बड़ी डेफिनेशंस लिखी जा रहे हैं, लिखी जा रहे हैं, लिखी जा रहे हैं।

बौद्धिक पूर्ववृत्त (Intellectual Antecedents) [35:04]

  • समाजशास्त्र के जन्म से पहले कई बौद्धिक विचारधाराएँ मौजूद थीं जिन्होंने इसके विकास में योगदान दिया।
  • इनमें राजनीतिक दर्शन (जैसे हॉब्स, लॉक, रूसो), इतिहास का दर्शन, विकास के जैविक सिद्धांत (डार्विन की थ्योरी से प्रभावित स्पेंसर) और सामाजिक सुधार आंदोलन शामिल थे।
  • सामाजिक सर्वेक्षणों, जैसे पॉवर्टी पर जॉनसन क्लेयर और ईडन द्वारा किए गए सर्वेक्षणों ने यह समझने में मदद की कि गरीबी एक सामाजिक समस्या है।

एंटीिसिडेंट एंटीिसिडेंट मतलब कि ऐसी क्या-क्या विचारधाराएं चल रही थी? इंटेलेक्चुअल विचारधाराएं चल रही थी जो कि सोशियोलॉजी के आने से पहले चल रही थी।

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